Mein nikla satya ke sandhan mein

मैं निकला सत्य के संधान में | दिन दहाड़े , डायोजिनिज के लालटेन ले के राजधानी के राजपथ पर, सत्ता के गलियों में, कलाकारों के रंग मंच में, मंदिर , मस्जिद और गिरिजाघरों में | ढ़ूँढ़ता रहा वो सच्च जो कबका खो गया है, या सुलाया गया है, राजनेताओं के सफाई , आरोप और प्रत्यारोप …

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